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सोमवार, 29 सितंबर 2025

अं होली के रंग: अंजू जैन गुप्ता

 


इस बार चंपू मार्च में अपनी परीक्षा समाप्त होने के बाद नाना- नानी के संग अंटार्कटिका घूमने जाता है। जैसे ही वे सभी अंटार्कटिका पहुँचते है चंपू जोरों से चिल्लाने लगता है नानू- नानी यहाँ पर तो कितनी ठंड है और चारों ओर बर्फ ही बर्फ है। देखो कितने सुंदर – सुंदर पेंग्विन है। चंपू की बाते सुनकर एक पेंग्विन दौड़ता हुआ उनके पास आता है और कहता है अंकल आंटी नमस्ते मेरा नाम चंकू है और मैं यही अपने परिवार के संग रहता हूं। आप सब मेरे संग चलो मैं आपको अपना घर दिखाता हूँ तभी चंपू के नाना जी कहते हैं नहीं बेटा हम बाद में आयेगें। अभी हम चलते हैं। इतना कहकर वे होटल चले जाते हैं। जैसे ही चंपू होटल के कमरे में पहुँचता है कहने लगता है नानी- नानी यहाँ तो पंखा ही नहीं है नानू कहते हैं कोई नहीं चंपू बेटा dekho यहाँ पर कितनी ठंड है फिर पंखे की तो जरूरत ही नहीं है। चंपू नानू की बात सुनकर कहता है हाँ जी नानू आप सही कह रहे हो यहाँ तो बहुत ठंड है बिना पंखे के ही इतनी ठंड लग रही है नानू पंखा चलाएंगे तो हम जम ही जायेगे। नानी कहती हैं चलो अब खाना खाकर सब सो जाते हैं कल सुबह जल्दी भी उठना है। चंपू कहता है, हाँ -हाँ नानी कल तो होली है। मैं भी जल्दी से सो जाता हूँ,मुझे कल चंकू के संग रंगों से होली खेलने भी जाना है। इतना कहकर सब सो जाते हैं।

सुबह उठते ही चंपू जल्दी से होली के कपड़े पहनकर तैयार हो जाता है और नानू नानी से कहता है नानू चलो न चंकू के घर मुझे उसके साथ रंगों से होली खेलनी है। नानू कहते हैं चंपू पेंग्विन रंगों से नहीं खेल सकते क्योंकि रंग उनके फेदर और स्किन को खराब कर सकता है और उनके लिए हानिकारक होता है। चंपू यह सुनते ही उदास हो जाता me और रोने लगता है और रोते रोते कहता है मुझे chanku के साथ खेलना है। उसके रोने की आवाज सुनकर नानी आती हैं और कहती है चंपू बेटा चुप हो जाओ जल्दी से अंगना में अंगूर रखे हैं वे ले आओ और हमारी उंगली पकड़ कर चलो हम रंग से नहीं पानी से होली खेल लेगे और साथ ही तुम्हारे मित्र को उपहार में अंगूर भी दे देंगे चंपू नानी की यह बात सुनकर खुशी से उछलने लगता है ये और वे सभी पेंग्विन के घर होली मनाने के लिये चले जाते हैं।



अंजू जैन गुप्ता


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