खाकर चूहे बिल्ली बोली।
नहीं हमारा पेट भरा।
जाकर खोजू चुन्नू के घर,
खाने का सामान जरा।।
म्याऊ, म्याऊ करती फिरती।
उछले कूदे, कभी न गिरती।
छेड़ो जरा तो आंख दिखाती।
गुस्से में थोड़ा गुर्राती।
शेर की मौसी कहलाती।
दूध मलाई चट कर जाती।।
मंजू यादव
खाकर चूहे बिल्ली बोली।
नहीं हमारा पेट भरा।
जाकर खोजू चुन्नू के घर,
खाने का सामान जरा।।
म्याऊ, म्याऊ करती फिरती।
उछले कूदे, कभी न गिरती।
छेड़ो जरा तो आंख दिखाती।
गुस्से में थोड़ा गुर्राती।
शेर की मौसी कहलाती।
दूध मलाई चट कर जाती।।
मंजू यादव
नव जीवन देते हैं पेड़।।
आस पास यदि पेड़ हमारे।।
तो हम जीवित रहेगें सारे।।
रंग बिरंगे फूल हैं पाते।।
देते फल जो,
हम हैं खाते।।
पेड़ों से मिलती हरियाली।।
पंछी बैठे डाली , डाली।।
पेड़ों से अस्तित्व हमारा।।
यदि पेड़ नहीं, तो सूना जग सारा।।
मंजू यादवहरे, भरे होते हैं पेड़।
नव जीवन देते हैं पेड़।।
आस पास यदि पेड़ हमारे।।
तो हम जीवित रहेगें सारे।।
रंग बिरंगे फूल हैं पाते।।
देते फल जो,
हम हैं खाते।।
पेड़ों से मिलती हरियाली।।
पंछी बैठे डाली , डाली।।
पेड़ों से अस्तित्व हमारा।।
यदि पेड़ नहीं, तो सूना जग सारा।।
मंजू यादव
ओजी के पास एक छोटा सा बिल्ली का बच्चा था जिसे वह प्यार से रोपसी कहकर बुलाता था। ओजी रोज़ स्कूल से आते ही उसके साथ खेलने लग जाता था।एक दिन ओजी स्कूल से आता है और आते ही कहने लगता है," रोपसी - रोपसी चलो जल्दी से मेरे साथ चलो मैं तुम्हें एक मीठी आवाज सुनाता हूँ , देखो हमारे बगीचे में कोयल कितना मीठा गाना गा रही है और उसका गाना सुनने तोता भी आया है। "
तभी रोपसी कहता है, अरे भई !मुझे पहले अखरोट तो खाने दो; देखो तुम्हारी मम्मी ने कितनी मेहनत से ओखली में इन्हें कूट- कूट कर मेरे लिए छोटा किया है ताकि मैं आराम से खा सकू। ओजी कहता है अच्छा एक काम करो तुम थोड़े से एक कटोरी में ले लो वही पर खा लेना। यह बात सुनते ही रोपसी कहता है very good ओजी तुमनें सही आइडिया दिया है। वह झट से अखरोट एक कटोरी में डाल लेता है और ओवरकोट पहनने लगता है; तभी ओजी कहता है अरे भई रोपसी अब तुम गर्मी में ओवरकोट क्यों पहन रहे हो? रोपसी कहता है ओजी ओजी बाहर देखो ओस की बूंदे पड़ी है। बाहर तो सर्दी होगी तुम भी अपना overcoat पहन लो नहीं तो तुम्हें सर्दी लग जाएगी इतना सुनकर ओजी जोरों से हँसने लगता है हा ..हा हा अरे भई गर्मी के मौसम में भी कोई ठंड लगती है!
रोपसी ओजी से गुस्सा हो जाता है कहता है जाओ में तुमसे बात नहीं करता। तुम मेरी बात पर हँसते हो। अब ओजी को लगा कि रोपसी तो उससे नाराज़ हो गया वह जल्दी से माफी माँगता है कहता है नहीं नहीं रोपसी मुझे माफ़ कर दो पर तुमने बात ही ऐसी की थी कि मुझे हँसी आ गई।
अच्छा सुनो बाहर ओस की बूंदे नहीं है वो तो बारिश की बूंदे हैं अभी थोड़ी देर पहले ही बारिश हुई थी उसी की बूंदे हैं।
इतना सुनकर रोपसी ओवरकोट रख देता है और ओढ़नी लेकर आ जाता है। अब बहुत मुश्किल से ओजी अपनी हँसी रोकते हुए पूछता है रोपसी तुम इस ओढ़नी का क्या करोगे, इसे क्यों लाए हो?
यह सुनकर रोपसी कहता है अगर फिर से बारिश हो गई तो हम इसे अपने सिर पर ढक लेगे और बारिश की बूंदे हमारे ऊपर नहीं गिर पायेगी।
ओजी कहता है नहीं नहीं रोपसी ओढ़नी की आवश्यकता नहीं है मैंने अपने साथ छाता ले लिया है।
अब चलो जल्दी से कहीं देर हो गई तो कोयल उड़ ना जाए। रोपसी भी कहता है हाँ हाँ चलो चले।
अंजू जैन गुप्ता
दादा-दादी एवं नाना-नानी कौन होते हैं? एक छोटी बच्ची ने निबंध लिखा कि,
😘दादा-दादी एवं नाना-नानी
एक महिला और एक पुरुष होते हैं।
जिनके अपने कोई छोटे बच्चे नहीं होते।
😘वे हमेशा दूसरों के बच्चों को भी पसंद करते हैं।
😘वे बाहर रहते हैं जब वे आते हैं तो हमें उन्हें लेने जाना होता है और बाद में वापस स्टेशन या एयरपोर्ट पर छोड़ने जाना होता है।
😘🫶🏻🫶🏻🫶🏻🫶🏻🫶🏻
😘वे हमेशा बूढ़े लोग होते हैं।
😘 वे बाहर का बना खाना पसंद नहीं करते।
😘जब वे हमें सैर पर ले जाते हैं, तो वे हमेशा धीरे धीरे चलते हैं।
😘वे हमसे हमेशा महापुरुषों के बारे में बात करते हैं।
😘वे किसी को बुरे शब्द नहीं बोलते।
😘आमतौर पर वे सुबह चाय या कॉफी पीते हैं।
😘वे चश्मा पहनते हैं
😘वे ब्रश करने के लिए अपने दांत निकाल सकते हैं 😄
😘नानी एवं दादी हमेशा मम्मी से ज़्यादा स्वादिष्ट खाना बनाती हैं।
😘दादा एवं नाना हमें ऐसी कहानियाँ सुनाते हैं जो हैरी पॉटर से भी बेहतर होती हैं।
😘दादा-दादी, नाना नानी मंमी पापा की तरह नहीं लड़ते। 🤭
😘हर किसी को कोशिश करनी चाहिए कि उसके पास दादी-दादा या नाना नानी हों।
😘वे हमारे साथ प्रार्थना करते हैं और हमें प्यार करते हैं।
😘दादाजी एवं नाना जी दुनिया के सबसे समझदार आदमी होते हैं लेकिन वे भुलकङ होते हैं। वे अपना चश्मा भी रखकर भूल जाते हैं!
*हो सके तो इसे अन्य दादा-दादी,नाना-नानी को भेजें। यह उनका मन ख़ुश कर देगा।*
संकलन : अर्पणा श्रीवास्तव
संत कबीर नगर
🌹❤️🌹
औली और मौली दोनों सहेलियाँ थीं और एक ही कक्षा में पढ़ती थीं। वे दोनों चौथी कक्षा में पढ़ती थीं। औली को पौधें लगाने का बहुत शौक था वह अपनी मम्मी की पौधों की देखरेख करने में भी मदद करती थी। वह मम्मी को मिट्टी खोदने के
औज़ार भी पकड़ा देती थी।
किंतु मौली इसके बिल्कुल विपरीत थी उसे बिल्कुल भी शौक नहीं था वह पौधों का ध्यान भी नहीं रखती थी। औली के बगीचे में लौकी और पालक लगी हुई थी। वह सारी सब्जियाँ खुश होकर खाती थी।एक दिन औली स्कूल में पालक की सब्जी और लौकी का हलवा लेकर जाती हैं वह मौली को कहती है, मौली तुम भी आज पालक की सब्जी और लौकी का हलवा खाकर देखो कितना स्वादिष्ट है । परंतु मौली कहती है नहीं नहीं, मुझे नहीं खानी ये सब्जियाँ मैं तो अपना सैंडविच ही खाऊँगी तुम ही खाओ ये सब्जियाँ बेकार सी। औली मौली की बात सुनकर उसे समझाती है और कहती है मौली ये सब्जियाँ बेकार नहीं होती है इनमें बहुत ताकत होती है ये तो हमें बीमारियों से बचाती है। लौकी में आयरन , फाइबर ,विटामिन सी और मैग्नीशियम होता है जो हमें दिल कि बीमारियों से और कब्ज से बचाती है। मौली मौन होकर औली की बात सुन रही थी। फिर औली कहती हैं कि पालक में भी आयरन सबसे ज्यादा होता है। जो हमे खून की कमी (एनीमिया की बीमारी) से बचाती है इसमें विटामिन ए ,मैग्नीशियम आदि होते हैं। ये दोनों ही हमारी immunity को बढ़ाती है और हमे बीमार होने से रोकती हैं। इतना सुनते ही मौली कहती है जो भी हो मेरा तो सैंडविच ही अच्छा है। दोनों अपना अपना खाना खा लेती हैं। दो दिन हो जाते है मौली स्कूल नहीं आती अब औली परेशान हो जाती है यह सोचकर कि मौली स्कूल क्यों नहीं आ रही है। औली स्कूल से दौड़ी दौड़ी घर पहुँचती है और अपनी मम्मी को आवाज़ लगाती है मम्मी मम्मी आप कहाँ हो? जल्दी से आओ ना और मुझे मौली के घर ले चलो उससे मिलना है मौली दो दिन से स्कूल नहीं आ रही है, पता नहीं उसे क्या हुआ? कही उसकी तबीयत तो खराब नहीं हो गयी है! औली की मम्मी फोन पर किसी औरत से बात कर कर रही थी वह औली की बात सुनकर जल्दी से फोन बंद कर देती है और औली के साथ मौली के घर चली जाती हैं। मौली के घर जाकर देखते हैं वहाँ मौली बिस्तर पर लेटी हुई औषधि खा रही होती है। औली मौली को बीमार देखती है तो उसे अच्छा नहीं लगता वह कहती है देखा मौली तुम सब्जियाँ नहीं खाती हो इसलिए तुम्हारी immunity भी बहुत कम है तुम बार बार बीमार हो जाती हो।
औली की बात सुनकर मौली रोने लगती है और कहती है हाँ हाँ औली तुम सही कह रही हो हमे सब्जियाँ खानी चाहिए। देखो ना डॉक्टर ने मुझे चॉकलेट, आइसक्रीम , पिज्जा और candies सब खाने के लिए मना किया है और ये कड़वी दवाइयाँ खाने के लिए दी है। डॉक्टर अंकल ने भी यही कहा है कि मेरी immunity बहुत कम है इसलिए मैं बार - बार बीमार हो जाती हूँ। इतना कहकर वह फिर से रोने लगती है।
औली उसे कहती है मौली कोई बात नही तुम लौकी,पालक और बाकी भी
सारी सब्जियाँ खाना शुरू कर दो तुम देखना फिर तुम जल्दी से ठीक हो जाओगी। और फिर हम पिज्जा और आइसक्रीम पार्टी भी करेगें। मौली तभी अपनी मम्मी से कहती है मम्मी मम्मी जल्दी से मेरे लिए सब्जियों का सूप ले आओ मैं पी लूँगी। मौली जल्दी से सारा सूप पी लेती है।
मौली की मम्मी कहती है अच्छा हुआ औली तुम घर गई
मौली कहती है हाँ हाँ औली मम्मी ठीक कह रही हैं देखो तुम्हारे आने से मैं सब्जियाँ भी खाने लगी हूँ। अब मैं जल्दी से ठीक होने जाओगी।
कुछ देर बाद औली की मम्मी मौली से कहती है मौली तुम अपना ध्यान रखना अब हम घर चलते हैं फिर मिलेंगे। मौली भी अपना सिर हिला कर कहती हैं ok आंटी bye bye। और मौली औली को भी bye करती है।
अंजू जैन गुप्ता
इस बार चंपू मार्च में अपनी परीक्षा समाप्त होने के बाद नाना- नानी के संग अंटार्कटिका घूमने जाता है। जैसे ही वे सभी अंटार्कटिका पहुँचते है चंपू जोरों से चिल्लाने लगता है नानू- नानी यहाँ पर तो कितनी ठंड है और चारों ओर बर्फ ही बर्फ है। देखो कितने सुंदर – सुंदर पेंग्विन है। चंपू की बाते सुनकर एक पेंग्विन दौड़ता हुआ उनके पास आता है और कहता है अंकल आंटी नमस्ते मेरा नाम चंकू है और मैं यही अपने परिवार के संग रहता हूं। आप सब मेरे संग चलो मैं आपको अपना घर दिखाता हूँ तभी चंपू के नाना जी कहते हैं नहीं बेटा हम बाद में आयेगें। अभी हम चलते हैं। इतना कहकर वे होटल चले जाते हैं। जैसे ही चंपू होटल के कमरे में पहुँचता है कहने लगता है नानी- नानी यहाँ तो पंखा ही नहीं है नानू कहते हैं कोई नहीं चंपू बेटा dekho यहाँ पर कितनी ठंड है फिर पंखे की तो जरूरत ही नहीं है। चंपू नानू की बात सुनकर कहता है हाँ जी नानू आप सही कह रहे हो यहाँ तो बहुत ठंड है बिना पंखे के ही इतनी ठंड लग रही है नानू पंखा चलाएंगे तो हम जम ही जायेगे। नानी कहती हैं चलो अब खाना खाकर सब सो जाते हैं कल सुबह जल्दी भी उठना है। चंपू कहता है, हाँ -हाँ नानी कल तो होली है। मैं भी जल्दी से सो जाता हूँ,मुझे कल चंकू के संग रंगों से होली खेलने भी जाना है। इतना कहकर सब सो जाते हैं।
सुबह उठते ही चंपू जल्दी से होली के कपड़े पहनकर तैयार हो जाता है और नानू नानी से कहता है नानू चलो न चंकू के घर मुझे उसके साथ रंगों से होली खेलनी है। नानू कहते हैं चंपू पेंग्विन रंगों से नहीं खेल सकते क्योंकि रंग उनके फेदर और स्किन को खराब कर सकता है और उनके लिए हानिकारक होता है। चंपू यह सुनते ही उदास हो जाता me और रोने लगता है और रोते रोते कहता है मुझे chanku के साथ खेलना है। उसके रोने की आवाज सुनकर नानी आती हैं और कहती है चंपू बेटा चुप हो जाओ जल्दी से अंगना में अंगूर रखे हैं वे ले आओ और हमारी उंगली पकड़ कर चलो हम रंग से नहीं पानी से होली खेल लेगे और साथ ही तुम्हारे मित्र को उपहार में अंगूर भी दे देंगे चंपू नानी की यह बात सुनकर खुशी से उछलने लगता है ये और वे सभी पेंग्विन के घर होली मनाने के लिये चले जाते हैं।
अंजू जैन गुप्ता