जन्माष्टमी व्रत की महिमा
जन्माष्टमी के विषय में हमारे शास्त्रों में विशेष रूप से चर्चा वर्णित है। हमें जन्माष्टमी व्रत-उपवास क्यों करना चाहिए, इससे जन-मानस को क्या लाभ मिल सकता है? आपको यह जानकारी है कि कृष्ण (कन्हैया) भगवान् विष्णु के अवतार हैं। भगवान विष्णु पुरी सृष्टि का पालन करते हैं। यदि इनके प्रति हम श्रद्धा पूर्वक भावनापूर्ण कोई भी कार्य करते हैं तो इससे हमें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
जन्माष्टमी व्रत-उपवास की महिमा :
जन्माष्टमी का व्रत रखना चाहिए, बड़ा लाभ होता है। इससे सात जन्मों के पाप-ताप मिटते हैं।
जन्माष्टमी एक तो उत्सव है, दूसरा महान पर्व है, तीसरा महान व्रत-उपवास और पावन दिन भी है।
‘वायु पुराण’ में और कई ग्रंथों में जन्माष्टमी के दिन की महिमा लिखी है। ‘जो जन्माष्टमी की रात्रि को उत्सव के पहले अन्न खाता है, यानी भोजन कर लेता है, वह नराधम है’ - ऐसा भी लिखा है, तथा जो उपवास करता है, जप-ध्यान करके उत्सव मना कर खाता है, वह अपने कुल की 21 पीढ़ियाँ तार लेता है और वह मनुष्य परमात्मा को साकार रूप में अथवा निराकार तत्त्व पाने में सक्षमता की तरफ बहुत आगे बढ़ जाता है। इसका मतलब यह नहीं कि व्रत की महिमा सुनकर मधुमेह वाले या कमजोर लोग भी पूरा व्रत रखें। ऐसे व्यक्ति को भावपूर्ण होकर नियम का पालन करना चाहिए। बालक, अति कमजोर तथा बूढ़े लोग अनुकूलता के अनुसार थोड़ा फल आदि खायें।
विशेष जानकारी : जन्माष्टमी के दिन किया हुआ जप अनंत गुना फल देता है। उसमें भी जन्माष्टमी की पूरी रात जागरण करके जप-ध्यान का विशेष महत्त्व है। जिसको मंत्र का थोड़ा जप करने को भी मिल जाय, उसके त्रिताप नष्ट होने में देर नहीं लगती।
‘भविष्य पुराण’ के अनुसार जन्माष्टमी का व्रत संसार में सुख-शांति और प्राणीवर्ग को रोगरहित जीवन देनेवाला, आयु बढ़ाने वाला, अकाल मृत्यु को टालनेवाला, गर्भपात के कष्टों से बचानेवाला तथा दुर्भाग्य और कलह को दूर भगानेवाला होता है।
आप धर्म से जुड़े एवं अधर्म का नाश करें।
डा. पशुपति पाण्डेय
सहायक महा प्रबंधक (रिटायर्ड)
भारतीय स्टेट बैंक
स्थानीय प्रधान कार्यालय
लखनऊ














