ओजी के पास एक छोटा सा बिल्ली का बच्चा था जिसे वह प्यार से रोपसी कहकर बुलाता था। ओजी रोज़ स्कूल से आते ही उसके साथ खेलने लग जाता था।एक दिन ओजी स्कूल से आता है और आते ही कहने लगता है," रोपसी - रोपसी चलो जल्दी से मेरे साथ चलो मैं तुम्हें एक मीठी आवाज सुनाता हूँ , देखो हमारे बगीचे में कोयल कितना मीठा गाना गा रही है और उसका गाना सुनने तोता भी आया है। "
तभी रोपसी कहता है, अरे भई !मुझे पहले अखरोट तो खाने दो; देखो तुम्हारी मम्मी ने कितनी मेहनत से ओखली में इन्हें कूट- कूट कर मेरे लिए छोटा किया है ताकि मैं आराम से खा सकू। ओजी कहता है अच्छा एक काम करो तुम थोड़े से एक कटोरी में ले लो वही पर खा लेना। यह बात सुनते ही रोपसी कहता है very good ओजी तुमनें सही आइडिया दिया है। वह झट से अखरोट एक कटोरी में डाल लेता है और ओवरकोट पहनने लगता है; तभी ओजी कहता है अरे भई रोपसी अब तुम गर्मी में ओवरकोट क्यों पहन रहे हो? रोपसी कहता है ओजी ओजी बाहर देखो ओस की बूंदे पड़ी है। बाहर तो सर्दी होगी तुम भी अपना overcoat पहन लो नहीं तो तुम्हें सर्दी लग जाएगी इतना सुनकर ओजी जोरों से हँसने लगता है हा ..हा हा अरे भई गर्मी के मौसम में भी कोई ठंड लगती है!
रोपसी ओजी से गुस्सा हो जाता है कहता है जाओ में तुमसे बात नहीं करता। तुम मेरी बात पर हँसते हो। अब ओजी को लगा कि रोपसी तो उससे नाराज़ हो गया वह जल्दी से माफी माँगता है कहता है नहीं नहीं रोपसी मुझे माफ़ कर दो पर तुमने बात ही ऐसी की थी कि मुझे हँसी आ गई।
अच्छा सुनो बाहर ओस की बूंदे नहीं है वो तो बारिश की बूंदे हैं अभी थोड़ी देर पहले ही बारिश हुई थी उसी की बूंदे हैं।
इतना सुनकर रोपसी ओवरकोट रख देता है और ओढ़नी लेकर आ जाता है। अब बहुत मुश्किल से ओजी अपनी हँसी रोकते हुए पूछता है रोपसी तुम इस ओढ़नी का क्या करोगे, इसे क्यों लाए हो?
यह सुनकर रोपसी कहता है अगर फिर से बारिश हो गई तो हम इसे अपने सिर पर ढक लेगे और बारिश की बूंदे हमारे ऊपर नहीं गिर पायेगी।
ओजी कहता है नहीं नहीं रोपसी ओढ़नी की आवश्यकता नहीं है मैंने अपने साथ छाता ले लिया है।
अब चलो जल्दी से कहीं देर हो गई तो कोयल उड़ ना जाए। रोपसी भी कहता है हाँ हाँ चलो चले।
अंजू जैन गुप्ता









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