ब्लॉग आर्काइव

शनिवार, 8 अगस्त 2026

खाकर चूहे बिल्ली बोली। नहीं हमारा पेट भरा।


 

खाकर चूहे बिल्ली बोली।

नहीं हमारा पेट भरा।

जाकर खोजू चुन्नू के घर,

 खाने का सामान जरा।।


म्याऊ, म्याऊ करती फिरती।

उछले  कूदे, कभी न गिरती।


छेड़ो जरा तो आंख दिखाती।

गुस्से में थोड़ा गुर्राती।


शेर की मौसी कहलाती।

दूध मलाई चट कर जाती।।




मंजू यादव 

हरे, भरे होते हैं पेड़।

 









नव जीवन देते हैं पेड़।।

आस पास यदि पेड़ हमारे।।

तो हम जीवित रहेगें सारे।।

रंग बिरंगे फूल हैं पाते।।

देते फल जो,

हम हैं खाते।।

पेड़ों से मिलती हरियाली।।

पंछी बैठे डाली ,  डाली।।


पेड़ों से अस्तित्व हमारा।।

यदि  पेड़ नहीं, तो सूना जग सारा।।

मंजू यादवहरे, भरे होते हैं पेड़।

नव जीवन देते हैं पेड़।।

आस पास यदि पेड़ हमारे।।

तो हम जीवित रहेगें सारे।।

रंग बिरंगे फूल हैं पाते।।

देते फल जो,

हम हैं खाते।।

पेड़ों से मिलती हरियाली।।

पंछी बैठे डाली , डाली।।


पेड़ों से अस्तित्व हमारा।।

यदि पेड़ नहीं, तो सूना जग सारा।।


मंजू यादव