नाना की पिटारी इन्टरनेट पर छोटे बच्चों के लिए हिन्दी की सितम्बर, 2025 को प्रकाशित एकमात्र मासिक निशुल्क पत्रिका संपादक शरद कुमार श्रीवास्तव, मेरठ उ प्र ईमेल nanakipitari@gmail.com
खाकर चूहे बिल्ली बोली।
नहीं हमारा पेट भरा।
जाकर खोजू चुन्नू के घर,
खाने का सामान जरा।।
म्याऊ, म्याऊ करती फिरती।
उछले कूदे, कभी न गिरती।
छेड़ो जरा तो आंख दिखाती।
गुस्से में थोड़ा गुर्राती।
शेर की मौसी कहलाती।
दूध मलाई चट कर जाती।।
मंजू यादव
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