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मंगलवार, 1 सितंबर 2026

 शुतुरमुर्ग


और बकरी की दोस्ती


(बाल कथा)


एक बड़े से वन्य उद्यान में एक लंबा-सा शुतुरमुर्ग और एक चंचल बकरी रहते थे। दोनों का स्वभाव अलग था, लेकिन वे बहुत अच्छे मित्र थे। शुतुरमुर्ग तेज़ दौड़ता था और बकरी ऊँची-ऊँची चट्टानों पर आसानी से चढ़ जाती थी।


एक दिन दोनों भोजन की तलाश में निकले। रास्ते में उन्हें एक छोटा मेमना गहरे गड्ढे में फँसा हुआ दिखाई दिया। वह डर के मारे ज़ोर-ज़ोर से मिमिया रहा था।


बकरी तुरंत चट्टान से उतरकर गड्ढे के पास पहुँची, लेकिन अकेले मेमने को बाहर नहीं निकाल सकी। उसने अपने मित्र शुतुरमुर्ग को आवाज़ दी।


शुतुरमुर्ग तेज़ी से दौड़कर आया। उसने अपनी लंबी गर्दन नीचे झुकाई। मेमने ने उसकी गर्दन को सावधानी से पकड़ लिया। बकरी ने पीछे से सहारा दिया। दोनों ने मिलकर मेमने को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।


मेमना खुशी से उछलने लगा और बोला, "आप दोनों ने मेरी जान बचा ली।"


शुतुरमुर्ग मुस्कुराया और बोला, "जब मित्र मिलकर काम करते हैं, तो कोई भी कठिन काम आसान हो जाता है।"


बकरी ने कहा, "हर किसी में कोई न कोई विशेष गुण होता है। हमें अपने गुणों का उपयोग दूसरों की भलाई के लिए करना चाहिए।"


उस दिन से वन्य उद्यान के सभी जानवर उनकी दोस्ती और सहयोग की प्रशंसा करने लगे।


शिक्षा: मिल-जुलकर किया गया कार्य कठिन से कठिन समस्या का भी सरल समाधान बन जाता है।




डॉक्टर मंजू यादव

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