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शनिवार, 16 अप्रैल 2022

"जय श्री राम" रचना प्रिया देवांगन प्रियू



मन से करो आराधना, प्रभु राम सब के साथ हैं।।
हैं सत्य के वे देवता, सिर पर रखे जो हाथ हैं।।
आगे बढ़ाना धर्म को, मन में सभी ये ठान लो।
छाये नहीं अंधेर तब, श्री राम को पहचान लो।।

मानव सुनो ये बात को, शिव राम दूजे प्राण हैं।
रहते सदा वे साथ में, करते सभी के त्राण हैं।।
देखे जहाँ हनुमान जी, मुस्कात जाते पास हैं।
शिव राम में जो डूबते, करते ह्रदय में वास हैं।।

चल कर  सनातन धर्म में, पाना सिया के राम को।
होगा सफल सब काम जी, आगे बढ़ाना नाम को।।
सुंदर बने ये देह जो, सब ईश के वरदान हैं।
करना नहीं तुम पाप जी, लेते क्षणों में जान हैं।।





प्रिया देवांगन "प्रियू"
राजिम
जिला - गरियाबंद
छत्तीसगढ़

Priyadewangan1997@gmail.com

बैसाखी का पर्व रचना अंजू जैन गुप्ता

 




अंजू जैन गुप्ता

"दुर्गा माता" प्रिया देवांगन "प्रियू" की रचना



जोत जलत हे जगमग जगमग, गूँजत हे किलकारी।
नव दिन बर माता रानी हर, आये हमर दुवारी।।

लाल लाल चूरी पहिरे अउ, लाली महुर रचाये।
लाली चुनरी ओढ़े माता, मुच मुच ले मुस्काये।।
सरग उपर ले दुर्गा दाई, बघवा करे सवारी।
नव दिन बर माता रानी हर, आये हमर दुवारी।।

महाकाल अउ राम चंद्र जी, हर दुर्गा स्तुति गावै।
नारद मुनि सँग सबो देवता, माथा अपन नवावै।।
कुष्मांडा अउ गौरी मइया, सब के हवै दुलारी।
नव दिन बर माता रानी हर, आये हमर दुवारी।।

कतको धरती संकट आथे, तुरते ओला टारे।
रूप धरे काली माता के, दानव मन ला मारे।।
करे पाप कलयुग मा मानव, ओखर लाये पारी।
नव दिन बर माता रानी हर, आये हमर दुवारी।।





प्रिया देवांगन "प्रियू"
राजिम
जिला - गरियाबंद
छत्तीसगढ़

Priyadewangan1997@gmail.com

बुधवार, 6 अप्रैल 2022

प्यारी तितली : शरद कुमार श्रीवास्तव







अम्मा देखो तितली प्यारी
कितनी सुंदर न्यारी न्यारी
हरी लाल नीली चटकीली
डिजाइन वाली पीली पीली

फूलों के ही रंग चुराई
फूलों संग खेलने आई
फूलों जैसी सुन्दर प्यारी
उडती फिरती हर फुलवारी



माँ मुझे तितली बनवादो
प्यारी एक फ्राक दिलादो
सजधज के शाला जाऊँगी
तब खूब पढ़लिख जाऊँगी





शरद कुमार श्रीवास्तव

" विद्यालय का उत्साह " अंजू जैन गुप्ता

 


रोली और विहान आज बहुत खुश हैं।रोली पाँचवी कक्षा में पढती है और विहान पहली(1st) कक्षा में पढता है।

आज जब माँ उन्हें सुबह उठाने जाती है ;तो क्या देखती है कि बच्चे तो अपने बिस्तर पर ही नही है उन्हें वहाँ न पाकर माँ घबरा जाती है  और उन्हें हर जगह खोजना आरम्भ  कर देती है।  तभी रोली पीछे से आ माँ को गले लगा लेती है और माँ भी रोली को स्कूल ड्रैस में देखकर आश्चर्यचकित रह जाती है।

माँ कहती है अरे ! यह क्या रोली तुम तो विद्यालय जाने के लिए  तैयार भी हो गई ,मैं तो तुम्हे उठाने आई थी और विहान कहाँ है ?वह कहीं नज़र नही आ रहा तभी विहान की आवाज आती है माँ- माँ मैं तो यही हूँ  ,देखो आपके सामने।आज तो मैं भी स्वयं ही  तैयार हो गया हूँ। चलो -;चलो माँ पापा को बोलो हमें  जल्दी से विद्यालय छोड़ दे नहीं तो देर  हमें देर हो जाएगी । आज तो हमे स्कूल जाना है।माँ यह देखकर और सुनकर फूली न समाती कि आज दोनो बच्चे विद्यालय जाने के लिए कितने उत्सुक है और उनके कितना उत्साह भरा हुआ है।आखिर आज बच्चे  पूरे दो साल के बाद विद्यालय जाएँगे ।

माँ कहती है कि विहान बेटा अभी तो विद्यालय जाने मे समय है , आओ तब तक मै तुम दोनो को कुछ महत्वपूर्ण बातें बता देती हूँ।

कुछ नियम है जिनका तुम्हे रोज पालन करना है। माँ की बात रोली और विहान कहते है कि, हाँ -हाँ माँ आप बताओ विद्यालय जाने के लिए तो आप  जो भी कहोगी हम सब करेगे ।

माँ कहती है कि बच्चो तुम्हें पता है न कि कोरोना  की वजह से ही सभी विद्यालय बन्द  हो गए थे और सभी की कक्षाएँ भी आनलाइन हो रही थी किन्तु अब जैसे जैसे कोरोना का प्रकोप  कम हो रहा है तो सभी विद्यालय धीरे- धीरे खुलते जा रहे है; किन्तु अभी भी कोरोना पूरी तरह  से समाप्त नही हुआ है इसलिए तुम दोनो को कुछ  नियमो का पालन करना पड़ेगा।जैसे-

* विद्यालय मे हर समय मास्क पहन कर रहना होगा।

* अपने साथ सैनिटाइजर रखना होगा और  जरूरत पड़ने पर हाथों को सैनिटाइज करना होगा।

* कुछ भी खाने से पहले और बाद मे हाथों को अच्छे से धोना होगा।

* एक दूसरे से थोड़ी दूरी बनाए  रखनी होगी।

* अपना टिफिन और पानी किसी से बाँटना  नही होगा।

 * तभी विहान बोल पड़ता है कि माँ आप ही तो कहती थी हमें  ( share)शेयर  करना चाहिए। (sharing )  शेयरिंग करना अच्छी बात है और अब आप ही ऐसा करने से मना कर रहे हो तभी रोली कहती है अरे बुदधु !  तुझे इतना भी नही पता कि कोरोना तो एक दूसरे को छूने से ही फैल जाता है अगर किसी को होगा तो हमे भी हो जाएगा तभी तो माँ हमे शेयरिंग करने के लिए मना कर रही है।

रोली की बात सुनकर माँ कहती है ,हाँ विहान बेटा रोली ठीक ही कह रही है और ऐसा सिर्फ थोड़े समय के लिए ही ऐसा करना है।

कुछ समय बाद जब तुम सब बच्चो को भी वैक्सीन लग जाएगी व  कोरोना का प्रकोप भी पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा तब तुम सब पहले की तरह  शेयरिंग भी कर सकते हो और मस्ती भी।

माँ की बात पूरी होते ही विहान कहता है , हाँ जी मम्मा हम सब बातों का ध्यान  रखेंगे और  सारे नियमों का पालन भी करेंगे। अब जल्दी से पापा को बोलो कि हमे विद्यालय छोड़  आए।विहान की बात सुनकर माँ बोलती है कि अरे मेरे नन्हे-  मुन्ने , प्यारे -प्यारे बच्चो पहले नाश्ता तो कर लो तभी  तो विद्यालय मे पूरे दिन पढ़ने व मस्ती  करने के लिए तुम्हें एनर्जी  मिल पाएगी।

माँ की बात सुनकर दोनो जल्दी से नाश्ता कर लेते है और तुरंत हीअपने पापा के साथ  विधालय के लिए  निकल पड़ते है।



अंजू जैन गुप्ता

गुरूग्राम

बाल रचना/तीतर-बटेर! : वीरेन्द्र सिंह बृजवासी

 


एक  दिवस तीतर बटेर  में

बहस   छिड़    गई    भारी

मैं तो  हूँ  बलशाली  तीतर

तू          बटेर        बेचारी।


मुझको  बेचारी मत कहना

मैं     हूँ   सब   पर    भारी

अरे   घमंडी    तीतर   तेरी

मती     गई     क्या   मारी।


तेरी  मादा   को   बंधन  में

रखता      रोज़     शिकारी

उसके  पीछे  दौड़  लगाना

 है           तेरी      लाचारी।


मुझे पालने  वाला  मुझको

रखे     जान     से    प्यारी

धन के लालच में लड़वाता

तुझको     सदा     जुआरी।


चुपके-चुपके  हमें  पकड़ने

आता       यहां     शिकारी

हमें पकाकर  खाते अक्सर

सब    घर    के    नर-नारी।


वैर  भाव  को  भूल  बढ़ाएं

इक     दूजे      से      यारी

बोला  तीतर   यूं  बटेर   से

सुन    ले    बात     हमारी।


(नोट तीतर  का शिकार  अपराध की श्रेणी मे आता है  संपादक)




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        वीरेन्द्र सिंह "ब्रजवासी"

            9719275453

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"कैसे दूँ बधाई" आज दिनांक 06 /04 को दिवंगत महेंद्र सिंह देवांगन माटी के जन्मदिन पर एक श्रद्धांजलि : रचना प्रिया देवांगन प्रियू

 


साल जन्म दिन आये जब भी, यादें बहुत सताती है।
चित्र देख कर पापा मेरी, आँखे नम हो जाती है।।

विद्यालय से वापस आते, राह ताँकती रहती थी।
जल्दी आओ पापा मेरे, फोन लगा कर कहती थी।।
कहाँ गया अब वो सारा दिन, यादें बहुत रुलाती है।
चित्र देख कर पापा मेरी, आँखे नम हो जाती है।।

केक सजा कर रखती थी मैं, मिलकर साथ मनायेंगे।
हाथ पकड़ कर काटेंगे हम, खुशियाँ भी फैलायेंगे।।
हँसने की आवाज आपकी, सुनने को तरसाती है।
चित्र देख कर पापा मेरी, आँखे नम हो जाती है।।

मिला प्यार जितना तुम से भी, दिल में मैं संजोती हूँ।
नयन बन्द कर मैं भी पापा, सपनों में भी रोती हूँ।।
साथ रहे जब बेटी पापा, घर में खुशियाँ लाती है।
चित्र देख कर पापा मेरी, आँखे नम हो जाती है।।

जन्म बधाई कैसे दूँ मैं, बैठे सोंचा करती हूँ।
नहीं दिखाई देते फिर भी, मन में आँहे भरती हूँ।।
जब-जब कविता लिखती हूँ मैं, याद तुम्हारी आती है।
चित्र देख कर पापा मेरी, आँखे नम हो जाती है।।



प्रिया देवांगन "प्रियू"
राजिम
जिला - गरियाबंद
छत्तीसगढ़

Priyadewangan1997@gmail.com

आँखें रचना प्रिया देवांगन प्रियू

 


मिलकर रहते हैं नयन, इक दूजे के संग।
हर पल करतें प्यार वो, यही हमारे अंग।।

लगे चोट गर देह को, बहाती आँखें धार।
बिन इसके जीवन नहीं, सूना यह संसार।।

देख किसी इंसान को, जाती है पहचान।
अच्छे साथी का सखी, करती है सम्मान।।

कितनी भी मुश्किल रहे, सहती फिर भी भार।
करती हैं ये सामना, नहीं मानती हार।।

आओ साथी हम सभी, सीखें रहना साथ।
जीवन आये दुख कभी, छोड़ें कभी न हाथ।।





प्रिया देवांगन "प्रियू"
राजिम
जिला - गरियाबंद
छत्तीसगढ़

Priyadewangan1997@gmail.com

चलो चलें स्कूल! वीरेन्द्र सिंह बृजवासी की रचना



गोलू, मोलू , छोटू,गुड़िया

चलो        चलें      स्कूल

सभी किताबें रखें बैग में

पोंछ      पोंछकर    धूल।


टीचरजी के लिए ले चलें

सुंदर    -   सुंदर      फूल

हाथजोड़कर करें प्रार्थना

नहीं       मारना      रूल।


करी पढ़ाई  लैपटॉप  पर

गए    सभी    कुछ   भूल

टीचरजी मुस्काकर बोलीं

तुम  हो  बिल्कुल    फूल।


गली-गली में  कोरोना के

बिछे      हुए     थे    शूल

फूल रहींथीं सांसें सबकी

मौसम     था    प्रतिकूल।


सुनी तुम्हारी  भी  ईश्वर ने

खोल       दिये        स्कूल

मास्कलगा निश्चित दूरीपर

डालो       सब        स्टूल।




       -------💐--------

         वीरेन्द्र सिंह "ब्रजवासी"

             9719275453

नन्ही चुनमुन का स्कूल का पहला दिन : रचना शरद कुमार श्रीवास्तव





 नन्ही चुनमुन का स्कूल  का पहला दिन

दो वर्ष  के लाॅकडाउन के बाद नन्ही चुनमुन का   स्कूल आज खुला ।   उसके पिछली क्लास  के  कई बच्चे नहीं आए थे ।   इनिका  के पापा दूसरे शहर चले गये थे , अर्नव  दूसरे स्कूल  मे चला गया धा  ।   पुराने दोस्तो मे अनेकों के बारे मे कुछ  पता नहीं है।   चुनमुन के बड़े भाई सुयश भी इसी स्कूल  मे है  लेकिन उनकी कक्षा  गत् मास से ही चल रहीं है और वे स्कूल  की दूसरी बिल्डिंग  मे पढ़ते हैं।

कुछ पुराने दोस्तों के मिलने पर चुनमुन  को बहुत  खुशी हुई ।   स्कूल प्रबंधन  का स्कूल  खोलने का यह आकस्मिक  निर्णय  था अतः कोई विशेष  तैयारी नही थी  टीचर्स  भी कम थीं गत वर्ष की उसकी क्लास  टीचर आयशा मैम की शादी हो गई  थी  नईवाली जैन मैम को कक्षा के बच्चो के बारे मे पता नही था  इसलिए आज उनका  समय  बच्चों  के साथ  बातचीत  करने मे लगा ।   जैन मैम बहुत  प्यारी हैं चुनमुन  को वो और उनको चुनमुन  बहुत  पसन्द  आईं।

चुनमुन ने बताया कि उसके क्लास  का एक बच्चा शाश्वत  पेन्सिल  बाक्स  भूल आया था।  उसने स्कूल  आते समय  बैग चेक  किया था फिर  भी उसने नोटिस  नहीं किया था कि उसमे पेन्सिल  बाक्स है कि नहीं ।  नई मैम ने फिर  क्लास  से शाश्वत  की सहायता के लिए  कहा तो  चुनमुन  ने झटपट  अपने साथ  की अतिरिक्त  पेन उसे लिखने के लिए दे दी।  

मैम  इस बात  से बहुत खुश  हुईं।   चुनमुन  की तत्परता, सहयोग और  लीडरशिप  देखकर  उसे क्लास  का माॅनीटर बना दिया।  चुनमुन  बहुत  खुश  हुई और उसके दिल  मे खुशी  की एक लहर दौड़ गई। 






शरद कुमार श्रीवास्तव