जिसने मेरा अंकुर पाला
नौ माह तक मुझे संभाला
धरती पर लाकर माता ने
जीवन रसको मुख में डाला
मैं प्यारी माँ के चरणों में
बारम्बार नमन करता हूँ।
दुविधाओं से मुझे बचाया
सुविधाओं का ढेर लगाया
मेरी नींदों को सहलाने
माँ ने गीत सलोना गाया
मैं न्यारी माँ के चरणों में
बारम्बार नमन करता हूँ।
सब पर ही ममता बरसाती
संतानों पर जान लुटाती
लिंग भेद करने वालों पर
नहीं ज़रा भी रहम दिखाती
मैं सुखकारी माँ चरणों में
बारम्बार नमन करता हूँ।
तेरे आशीषों से माता
जीवनका हर पल मुस्काया
प्रथम गुरू बनकर माँ तूने
भाषाओं का ज्ञान कराया
मैं हितकारी माँ चरणों में
बारम्बार नमन करता हूँ।
तेरी मुस्कानों पर माता
सकल देव जाते बलिहारी
तेरी गोदी में आने को
बन जाते बालक अवतारी
मैं जगतारी माँ चरणों में
बारम्बार नमन करता हूँ।
वीरेन्द्र सिंह ब्रजवासी
मुरादाबाद/उ,प्र, 9719275453


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