मेरा गाँव है बड़ा सुहाना,
पीपल का है छांव पुराना।
जिसमें बैठे दादा काका,
ताऊ भैया और बाबा ।
तरह तरह की बातें बताते,
नया नया किस्सा सुनाते ।
कभी नही वे लड़ते झगड़ते,
आपस में सब मिलकर रहते ।
सुख दुख में सब देते साथ,
देते हैं हाथों में हाथ ।
चारों ओर है खुशियाँ छाई,
हिन्दू मुस्लिम भाई भाई ।
तीज त्योहार मिलकर मनाते,
आपस में हैं गले मिलाते ।
स्वच्छ सुंदर मेरा गाँव,
चारों ओर हैं पेड़ों की छांव ।
महेन्द्र देवांगन "माटी"
गोपीबंद पारा पंडरिया
जिला -- कबीरधाम (छ ग )
पिन - 491559
मो नं -- 8602407353
Email -mahendradewanganmati@gmail.com
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सोमवार, 26 दिसंबर 2016
महेन्द्र देवांगन का बालगीत
मेरा गाँव है बड़ा सुहाना,
पीपल का है छांव पुराना।
जिसमें बैठे दादा काका,
ताऊ भैया और बाबा ।
तरह तरह की बातें बताते,
नया नया किस्सा सुनाते ।
कभी नही वे लड़ते झगड़ते,
आपस में सब मिलकर रहते ।
सुख दुख में सब देते साथ,
देते हैं हाथों में हाथ ।
चारों ओर है खुशियाँ छाई,
हिन्दू मुस्लिम भाई भाई ।
तीज त्योहार मिलकर मनाते,
आपस में हैं गले मिलाते ।
स्वच्छ सुंदर मेरा गाँव,
चारों ओर हैं पेड़ों की छांव ।
महेन्द्र देवांगन "माटी"
गोपीबंद पारा पंडरिया
जिला -- कबीरधाम (छ ग )
पिन - 491559
मो नं -- 8602407353
Email -mahendradewanganmati@gmail.com
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